Share this
नई दिल्ली। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे (17-19 फरवरी) से पहले भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों में बड़ा कदम उठाया गया है। गुरुवार (12 फरवरी 2026) को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 मेक इन इंडिया राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा सौदों में से एक मानी जा रही है।
डीएसी की बैठक में मिली मंजूरी
रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की अहम बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इससे पहले डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे चुका था। अब यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास अंतिम मंजूरी के लिए जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, 114 में से 16 राफेल विमान सीधे फ्रांस से खरीदे जा सकते हैं, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इस डील से वायुसेना की 5 से 6 नई स्क्वाड्रन खड़ी की जा सकेंगी। एक स्क्वाड्रन में आमतौर पर 18 से 20 लड़ाकू विमान होते हैं।
जीटूजी मॉडल पर होगी डील
यह सौदा भी पिछले राफेल समझौतों की तरह सरकार से सरकार (G2G) मॉडल पर होगा। करार के बाद फ्रांसीसी कंपनी दासो एविएशन भारत में किसी स्वदेशी कंपनी के साथ मिलकर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी। इन विमानों में करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण और हथियार शामिल किए जाएंगे।
ऑपरेशन सिंदूर बना अहम कारण
भारतीय वायुसेना ने घटती स्क्वाड्रन क्षमता को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव दिया था। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान राफेल की ऑपरेशनल क्षमता को देखते हुए मेक इन इंडिया के तहत उत्पादन का निर्णय लिया गया। वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने राफेल को ऑपरेशन सिंदूर का “हीरो” बताया था।
इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाने में राफेल का उपयोग किया गया था।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी डील
साल 2016 में भारत ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए करीब 59 हजार करोड़ रुपये का समझौता किया था। वहीं, इसी वर्ष अप्रैल में नौसेना के लिए 26 राफेल (एम) मरीन वर्जन विमानों की 63 हजार करोड़ रुपये की डील हुई थी। इन विमानों को आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा।
एमआरएफए प्रोजेक्ट पर असर
अगर 114 राफेल प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो भारतीय वायुसेना का पुराना एमआरएफए (MRFA) प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा सकता है। एमआरएफए के तहत भी 114 फाइटर जेट मेक इन इंडिया के तहत बनाए जाने थे, लेकिन उसमें विभिन्न विदेशी कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकती थीं। मौजूदा प्रस्ताव सीधे भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच समझौते के तहत होगा।










