“दिल्ली में संवैधानिक संकट पर भाजपा विधायकों की राष्ट्रपति से विशेष मुलाकात”

file pic
Share this

BBN24/31 अगस्त 2024:  शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और दिल्ली में चल रहे कथित ‘‘संवैधानिक संकट’’ के मुद्दे पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल, जिसकी अगुवाई दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता कर रहे थे, ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा और दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

दिल्ली में कथित 'संवैधानिक संकट' को लेकर भाजपा विधायकों ने राष्ट्रपति से मुलाकात  की - Navabharat News

इस प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे दिल्ली सरकार के वर्तमान स्थिति पर तत्काल हस्तक्षेप करें, यह दावा करते हुए कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चार महीनों से अधिक समय से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते जेल में हैं। भाजपा का कहना है कि इस स्थिति ने दिल्ली में प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह से बाधित कर दिया है, जिससे नागरिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में भाजपा ने ‘‘आप’’ सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें कहा गया है कि सरकार ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। आरोप लगाया गया है कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में देरी हो रही है, आवश्यक सेवाओं में विघ्न आ रहा है, और सरकार के भ्रष्टाचार और केंद्र की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में अड़चन डालने के आरोप भी लगाए गए हैं। इस ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इन संवैधानिक उल्लंघनों और शासन की विफलताओं को देखते हुए दिल्ली सरकार को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।

इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की यह कार्रवाई संविधान के प्रति उनके सम्मान की कमी को दर्शाती है। ‘‘आप’’ ने आरोप लगाया कि भाजपा दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही हार स्वीकार कर चुकी है और चुनावी जीत को सुनिश्चित करने के लिए ‘‘समानांतर सरकार’’ चलाने का प्रयास कर रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि भाजपा के इस कदम से यह साफ हो गया है कि वे दिल्ली में आप सरकार को बर्खास्त करने के लिए राष्ट्रपति के पास जाकर अपनी हार की स्वीकार्यता की स्थिति में हैं।

इस संवैधानिक संकट को लेकर दोनों पक्षों के बीच की राजनीति गरमाती जा रही है, और यह मुद्दा दिल्ली की राजनीतिक परिस्थितियों में एक नया मोड़ ले सकता है। भाजपा और आप के बीच चल रही इस शक्ति संघर्ष के बीच, राष्ट्रपति के इस मुद्दे पर क्या कदम उठाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।